






धरमजयगढ़। क्षेत्र में ऐसे अनेक मामले प्रकाश में आए हैं, जिनमें फर्जी राशन कार्ड बनाकर अनाज आबंटित किया जा रहा है। हैरानी की बात यह कि एक ही व्यक्ति का नाम अलग–अलग विकासखंडों में राशनकार्ड पर दर्ज है और उस पर आधार कार्ड भी संलग्न है। नतीजा कि वही व्यक्ति लगातार दो जगह से राशन पा रहा है। और वास्तविक पात्र गरीब खाली हाथ रह जाते हैं। जिससे अनुमान लगाया जा सकता है, कि इस खेल से शासन को लाखों का चूना लगाया जा रहा है। ज़ाहिर है कि इसमें मात्र छोटे संचालकों की संलिप्तता नहीं बल्कि ऊपरी स्तर तक की मिलीभगत होने का अंदेशा साफ झलकता है। यदि समय-समय पर विभागीय अधिकारी गंभीरता से जांच करते, तो इतनी बड़ी अनियमितता संभव ही नहीं थी।
जनकल्याण की योजनाओं के तहत गरीब और मज़दूर वर्ग के हित में संचालित शासकीय राशन दुकानों में घोटालों का काला खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। धरमजयगढ़ क्षेत्र की अनेक दुकानों में हितग्राहियों को मिलने वाला चना, शक्कर, नमक और चावल या तो अधूरा दिया जा रहा है अथवा पूरी तरह दबा लिया जाता है। स्थिति यह है कि पीड़ित हितग्राही शिकायत तो दर्ज कराते हैं, कहीं न कहीं प्रशासनिक कार्रवाई भी होती है, दोषी संचालकों पर नोटिस, निलंबन और जेल तक की कार्यवाही भी की जाती है, किंतु गरीबों के हिस्से का राशन उन्हें फिर भी नहीं लौटाया जाता।
वहीं हितग्राहियों का कहना है कि जब दुकान संचालक अनाज नहीं देते तो हम अधिकारी तक अपनी पीड़ा पहुँचाते हैं, किंतु जांच–पड़ताल के बाद भी हमारा हक़ हमें वापस नहीं मिलता। आखिर वह राशन जाता कहां है? यह सबसे बड़ा सवाल है, जिसका जवाब न तो संचालक देते हैं और न ही जिम्मेदार अधिकारी।
फिलहाल संबंधित अधिकारियों को इस पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई है, और उन्होंने इसे जांच का विषय बताते हुए आश्चर्य प्रकट किया है। बहरहाल धरमजयगढ़ क्षेत्र में उजागर हो रहे, इस राशन घोटाले की परतें कब और कैसे खुलेंगी, और गरीबों को उनका वास्तविक हक़ कब मिल पाएगा, ये बहुत ही जल्द सामने आने वाली है।
आगे की अपडेट में संभवतः बड़ा खुलासा सामने आएगा।






