






धरमजयगढ। धरमजयगढ़ जनपद के ग्राम नवागांव में अवैध रूप से कीटनाशक एवं रासायनिक खाद की आपूर्ति करने आए एक पिकअप वाहन को ग्रामीणों ने सजगता से पकड़कर स्थानीय पुलिस थाने में लेकर गये, लेकिन मिली सुत्रों नुसार पुलिस को वाहन को नहीं सौंपा गया।

बहरहाल ग्रामीणों की इस तत्परता से एक बड़ा अनियमित कारोबार उजागर हुआ, जो लंबे समय से क्षेत्र में कृषि उत्पादों की आड़ में चलाया जा रहा था। और वहीं ग्रामवासियों का आरोप है कि संबंधित संस्था शिव शक्ति एग्रीटेक लिमिटेड, दुर्गापुर द्वारा समय-समय पर इस प्रकार की आपूर्ति की जाती रही है। और वहीं बीते कल को जब उक्त वाहन संदिग्ध स्थिति में गांव पहुंचा, तो ग्रामीणों ने तत्काल पकड़कर पुलिस को सूचना दी। वाहन में लोड खाद और अन्य रासायनिक द्रव्यों की मात्रा और गुणवत्ता को लेकर गहरा संदेह जताया गया।

इधर मामले की जानकारी मिलते ही कृषि विभाग की टीम ने दुर्गापुर स्थित दुकान में दबिश दी और तत्काल प्रभाव से दुकान को सील कर दिया। और वहीं विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि कृषकों से प्राप्त सूचना के आधार पर विकासखंड एवं उप संचालक कृषि रायगढ़ के संयुक्त निरीक्षण दल ने कार्यवाही करते हुए 1985 के उर्वरक नियंत्रण आदेश के खंड 4, 7 और 35 का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्था का विक्रय स्थल सीलबंद कर दिया है। और वहीं कार्रवाई के दौरान दुकान से 22 बोरी रासायनिक एवं कार्बनिक खाद जब्त की गई, जिसकी अनुमानित बाजार मूल्य ₹31,600 आँकी गई है। साथ ही संस्था का लाइसेंस निलंबित करने हेतु अनुशंसा उप संचालक कृषि रायगढ़ को भेजी गई है।

व्यापारियों में आक्रोश, उठे गंभीर सवाल
वहीं इस कार्रवाई से जहां एक ओर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कृषि व्यापारियों में विभाग के प्रति गहरा रोष देखा गया। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि इस अवैध व्यापार की जानकारी पूर्व में भी कई बार विभागीय अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। व्यापारियों के अनुसार सीजन में बाहरी एजेंसियों द्वारा भारी मात्रा में अवैध बिक्री कर ली जाती है, जिससे वैध व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब वे सरकार को निर्धारित शुल्क अदा कर वैधानिक तरीके से व्यवसाय करते हैं, तब विभाग की यह निष्क्रियता न केवल व्यवसाय को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि कृषकों के लिए भी खतरा बनती है।

कार्रवाई पर उठे संदेह
बता दें,स्थानीय किसानों और व्यापारियों ने इस कार्रवाई को ‘मात्र दिखावा’ करार दिया है। उनका मानना है कि जब तक व्यापारियों का आक्रोश व मीडिया में मामला नहीं आया, विभाग ने कोई तत्परता नहीं दिखाई। अब जब मामला गरमा गया है, तो कार्रवाई कर खानापूर्ति की जा रही है। कुछ व्यापारियों व लोगों ने यहां तक कह डाला कि विभाग और संबंधित संस्था के बीच मिलीभगत की भी जाँच होनी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई एक स्थायी हल की ओर ले जाती है या फिर आने वाले दिनों में फिर किसी दूसरे गांव में ऐसा ही कोई पिकअप वाहन अवैध माल लेकर पहुंच जाएगा।
आखिर जिस पिकअप को ग्रामीणों ने पकड़ा वो अचानक संदेह हास्यपद स्थिति से कहा हुई गायब ??
ग्रामीणों ने जिस पिकअप को आज पकड़ा था वह भी कहीं गायब हो गई या कहें स्थानिक कृषि विभाग ने उसे पकड़ने में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई मानो उसे अभय दान दिया हो
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जब इस बात की जानकारी विभाग को दी गई तो उन्होंने पिकअप मै माल को भी जफ्ती बनाना उचित नहीं समझा और कह दिया की मामला अभी थाना मै है हम आपको बता दें
कि जिस जगह मै उस गाड़ी को पकड़ा गया था हाथापाई की भी नौबत आ गई , विभाग द्वारा यदि पूर्व में ही कार्यवाही की जाती तो शायद यह नौबत ना आती, क्योंकि क्षेत्र में कई वर्षों से यह कार्य शतत जारी है कुछ लोगों को चोट भी लगा और थाने में एफ .आई .आर भी दर्ज किया गया है। घर घर ले जाकर किसानों को अवैध रूप से बेचे जा रहे

कीटनाशक खाद्य पदार्थ को लेकर के स्थानीय व्यापारियों ने भी अपना विरोध दर्ज किया है। और उनका कहना है कि यदि यह अवैध कार्य बंद नहीं किया गया तो हम सब आंदोलन के लिए भी बाधित होंगे जिसकी संपूर्ण जवाबदेही स्थानीय विभाग की होगी क्योंकि इनके इस अवैध व्यापार से हमे भी आर्थिक क्षति पहुंच रही है।






