
धरमजयगढ़। क्षेत्र में फ्लाइएश परिवहन करने वाले भारी वाहनों का संचालन अब गंभीर जनसमस्या का रूप लेता जा रहा है। दिन-रात सड़कों पर दौड़ रहे ये वाहन न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण और आमजन के स्वास्थ्य पर भी सीधा दुष्प्रभाव डाल रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इन वाहनों से उड़ने वाली राख और धूल ने जीवन को दूभर बना दिया है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि बड़ी संख्या में फ्लाइएश का परिवहन खुले वाहनों में किया जा रहा है, जो कि पर्यावरण अधिनियम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों के तहत फ्लाइएश परिवहन के दौरान वाहनों को पूरी तरह ढंकना, निर्धारित मार्गों का पालन करना और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय अपनाना अनिवार्य है।
इसके अलावा, मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत भी ओवरलोडिंग और असुरक्षित ढुलाई दंडनीय अपराध है, जिसके लिए जुर्माना और वाहन जब्ती तक का प्रावधान है। बावजूद इसके, क्षेत्र में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
स्थानीय प्रशासन, परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि ये सब दिखने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही हैँ , जिससे आमजन में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्रवासियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से
बिना ढंके फ्लाइएश परिवहन पर तत्काल प्रतिबंध
नियम उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों व कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई.
प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कवाने की बाते कही हैँ.
जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी
नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह आने वाले समय में बड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।
इसी को लेकर स्थानीय जागरूक नागरिकों और समाजसेवियों की टीम अब कलेक्टर कार्यालय तथा राज्य शासन के संबंधित विभागों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रही है, ताकि इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
