






धरमजयगढ़। पंचायत की नींव हमेशा विकास की ईंटों से रखी जाती है, पर ठाकुरपोड़ी ग्राम पंचायत में यह नींव खोखलेपन और लालच की गारे से भरी गई। ग्रामीणों के सपनों में सजी सीसी रोड, पक्की नालियाँ, ऊँची पानी टंकी और दुरुस्त भवन—सब कागज़ों में पूरे हुए, लेकिन ज़मीनी हकीकत में अधूरे ढाँचे और टूटी उम्मीदें ही बिखरी पड़ी हैं।
30 जुलाई को जब जांच टीम ने गांव की गलियों से गुजरते हुए तथाकथित विकास कार्यों का मुआयना किया, तो सामने आया कि करोड़ों की राशि खर्च बताकर केवल धोखे का खेल खेला गया। चार लाख की स्वीकृति वाली सीसी रोड महज़ डेढ़ लाख में ठहर गई, दो लाख की नाली आधी-अधूरी रह गई, और पुलिया तो मानो सिर्फ सरकारी रजिस्टर में ही बनी—जमीन पर उसका नामोनिशान नहीं।
कागज़ों पर चमक, धरातल पर सन्नाटा
जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत में 15वीं वित्त आयोग और मुख्यमंत्री ग्राम उत्कर्ष योजना से मोटी रकम आई, पर गांव की तस्वीर वही पुरानी—कीचड़ से लथपथ रास्ते, अधूरी नालियाँ और प्यास बुझाने को अधूरी पानी टंकी। दस्तावेज़ चमचमाते हैं, लेकिन गांव अंधेरे में डूबा हुआ है।
दोषियों का नाम उजागर
जांच प्रतिवेदन ने सरपंच सुभा केरकेट्टा और सचिव डमरूधर पटेल की मिलीभगत को दोषी ठहराया। उन पर आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर ₹10,25,170 की राशि ग़लत तरीके से खर्च दर्शाई गई। अब इस धनराशि की वसूली का प्रस्ताव रखकर रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेज दी गई है।
ग्राम सभा में टकराहट
बता दें, मिली जानकारी अनुसार 25 अगस्त की ग्राम सभा में जब ग्रामीणों ने लेखा-जोखा माँगा, तो सचिव निरुत्तर रह गए। उनका यह कहना कि “पिछले वर्ष कोई काम ही नहीं हुआ” सुनकर लोग हतप्रभ रह गए, क्योंकि कागज़ तो करोड़ों की राशि बहाने का सबूत दे रहे थे। मामले में वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आवाज़ न उठाई जाती, तो लाखों रुपये बिना किसी काम के हज़म कर लिए जाते। वे न केवल वसूली बल्कि दोषी सचिव को हटाने और कठोर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
लेकिन वहीं ठाकुरपोड़ी की यह घटना केवल एक पंचायत की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है, जहाँ विकास के नाम पर धन आता है और भ्रष्टाचार की गहराइयों में समा जाता है।






