






धरमजयगढ़ की पहचान बना कूमा पंचायत का अमृत सरोवर,धरती की प्यास बुझाता “अमृत सरोवर” बनी समृद्धि की पहचान।
धरमजयगढ़। विकासखंड धरमजयगढ़ के दुरांचल ग्राम पंचायत कूमा में महात्मा गांधी नरेगा के तहत निर्मित अमृत सरोवर आज ग्रामीण जीवन के लिए संजीवनी बन चुका है। मात्र 1.40 एकड़ भूमि पर रचा गया यह जलाशय, 11,900 क्यूबिक मीटर पानी को अपने आँचल में समेटे हुए है। वहीं मिली जानकारी अनुसार अब इस सरोवर से 13.82 एकड़ खेतों की प्यास बुझ रही है। सूखी धरती अब हरियाली से मुस्कुरा रही है, और किसानों की आँखों में नई उम्मीदों का उजाला उतर आया है। कभी वर्षा पर निर्भर रहने वाले खेत अब चौमासे में भी लहलहा रहे हैं।
उल्लेखनीय है, कि जन सम्पर्क विभाग द्वारा इस अमृत सरोवर का वीडियो और फोटोग्राफ फेसबुक पेज पर साझा किया गया है, जिसे लोग बड़ी संख्या में देख और साझा कर रहे हैं। यह सरोवर केवल जल संरक्षण का प्रतीक नहीं, बल्कि आजीविका संवर्धन का माध्यम भी बन गया है। इसी वजह से यह छोटा-सा गाँव आज पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र है।

बता दें,कूमा पंचायत का यह अमृत सरोवर केवल जल संरक्षण का प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए आजीविका संवर्धन का स्रोत बन गया है। खेतों में सोने जैसी फसलें लहलहा रही हैं और यही कारण है कि आज यह छोटा-सा गाँव पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बन गया है। वहीं धरती से जुड़ा यह प्रयास साबित करता है, कि जब जल को संजोया जाता है, तो समृद्धि अपने आप जीवन में उतर आती है। धरमजयगढ़ की मिट्टी अब केवल मिट्टी नहीं रही, बल्कि किसानों की मुस्कान और समृद्ध भविष्य की धरोहर बन चुकी है।

और वहीं इस सफल पहल के पीछे कई हाथों का अथक परिश्रम और समर्पण रहा है। जिसमें जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के सीईओ, अभियंता यादवमणी कमलवंशी, रोजगार सहायक चक्रधर राठिया, सचिव नंदलाल भगत और पूर्व सरपंच राजेन्द्र प्रसाद राठिया ने अपने संघर्ष और प्रयासों से कूमा पंचायत को जिले ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में अमृत सरोवर को प्रथम श्रेणी की पहचान दिलाई है। आज इनके कार्य को प्रदेशभर में सराहना मिल रही है और कूमा पंचायत का नाम सम्मानपूर्वक लिया जा रहा है।






