






धरमजयगढ। अपनी समस्या से लेकर गांव की मुलभूत सुविधा को लेकर ग्रामीणों को स्थानीय जनप्रतिनिधि व प्रशासन से लगातार जद्दोजहद करनी पड़ी है। लेकिन कई ऐसे गांव व शहर हैं, जहां के स्थानीय जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक कर्मचारी के कान में जूं तक नहीं रेंगती है। और खामीयाजा आमजनताओं को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां के ग्रामीणों को पंचायत मुख्यालय पहुंचने व अन्य किसी काम से बाहर निकलने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। मामला धरमजयगढ़ के ग्राम पंचायत कुमा का है, जहां पर आश्रित मोहल्ला नकनापारा से पंचायत मुख्यालय पहुंच मार्ग पर स्थित पुलिया पिछले वर्ष से क्षतिग्रस्त है — मिट्टी धंसी, ईंटें बिखरी और बीच राह बना एक गड्ढा, जो हर गुजरने वाले को डराता है।

यह वही रास्ता है जिससे स्कूली बच्चे रोज़ गुजरते हैं, महिलाएं राशन लाने जाती हैं और बुजुर्ग गांव से शहर तक की दूरी नापते हैं। लेकिन यह सब आज खतरे के साए में है। जिससे मोहल्लेवासियों को आने जाने में भय बना रहता है। मोहल्लेवासियों के बताए अनुसार पुलिया का ध्वस्त होना बीते सत्र नवंबर दिसंबर माह का है। जिसके बाद उन्होंने उस दौरान रहे सरपंच से लेकर सचिव को भी कई बार अवगत कराया लेकिन सरपंच सचिव ने कोई ध्यान नहीं दिया। आगे उन्होंने बताया कि यह मार्ग न केवल नकनापारा को पंचायत मुख्यालय से जोड़ता है, बल्कि पटेलपानी, खुरूनूपानी जैसे दूरस्थ वनांचल गांवों की जीवनरेखा भी है। फिर भी जिम्मेदारों के कानों तक यह सिसकी नहीं पहुंच पाई।
वहीं गांव के लोगों को एकमात्र उसी ध्वस्त हुई पुलिया से डरे सहमे गुजरना पड़ रहा है। वहीं गांव के केसबो ग्रामीण ने बताया पुलिया के नाम पर मौत का कुआं बना हुआ है साहब… लेकिन हमारी सुनवाई कोई नहीं करता। उन्होंने बताया कि पूर्व सरपंच पूर्णतः निष्क्रिय रहे और सचिव से कुछ अपेक्षा थी, लेकिन अब वहां भी अनदेखी का आलम है।

आगे उन्होंने कहा कि अब आजकल सचिव का भी कई खामियां हैं सहाब, लेकिन हम अपने ग्राम पंचायत का बदनाम नहीं करना चाहते हैं, लेकिन आज जब हमारी सुविधा की बात आई तो केवल रास्ते के लिए कहना पड़ रहा है। आगे उन्होंने बताया कि हमारे मोहल्ले से सौतेला व्यवहार शुरू से ही किया जाता रहा है। और हमें हमारी सीधेपन का फायदा उठाते हुए हर कार्य को लेकर बेवकुप बनाकर रख दिया जाता है। लेकिन हम बस पंचायत का बदनाम नहीं करना चाहते हैं इसीलिए चुप रहते हैं,जिसका गलत मतलब निकालकर सरपंच सचिव जनप्रतिनिधि फायदा उठाते हैं।
लेकिन वहीं बड़ा सवाल सरपंच सचिव द्वारा इस तरह का इन मोहल्लेवासियों के समस्याओं पर अनदेखा क्यों किया जा रहा है? क्या इन मोहल्लेवासियों को मुलभूत सुविधा नहीं चाहिए? या फिर वाकई में सौतेला व्यवहार किया जा रहा है? बड़ी विडंबना है, कि जहां पर एक छोटी समस्या का समाधान ग्राम पंचायत जनप्रतिनिधि व सचिव नहीं कर पा रहे हैं।
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