
धरमजयगढ़।
तमनार में जिंदल पॉवर कोल ब्लॉक की जन सुनवाई गलत तरीके से 8 दिसंबर का संपन्न हुआ था। ग्रामीण जन सुनवाई निरस्त करने की मांग कर रहे थे ग्रामीणों की मांग को प्रशासन अनसुना करते हुए गलत तरीके से जन सुनवाई को अंजाम दिया गया। ग्रामीण जन सुनवाई को फर्जी जन सुनवाई करार देते हुए, 12 दिसंबर से जन सुनवाई का विरोध में 14 गांव के ग्रामीण आंदोलन कर रहे थे। ग्रामीणों का आंदोलन शांति ढंग से चल रहा था,

ग्रामीणों ने आर्थिक नाके बंदी कर रखा था जिससे जिंदल कंपनी को भारी नुकसान हो रहा था। जिला प्रशासन के दबाव में स्थानीय प्रशासन आर्थिक नाके बंदी को खत्म करने की कोशिश किया। प्रशासन की इस रैवाये पर ग्रामीण उग्र हो गये, और धीरे-धीरे आंदोलनकारी हिंसक हो गये और बस, कार एवं एक एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया, तो वहीं दौड़ा दौड़कर पुलिस वालों की पिटाई करते रहे। मारपीट में कई पुलिस कर्मी बुरी तरह से घायल हुआ। ग्रामीणों की मार से कई लोगों को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ा। लेकिन इन सब घटना क्रम में एक ऐसा घटना भी देखा गया जो मानवता को शर्मसार करने वाली थी जो समाज कभी भी स्वीकार नहीं कर सकता? कि आंदोलनकारी ऐसा भी कर सकते हैं?

क्यों शर्म नहीं आई देखने वालों को?
27 दिसंबर को आंदोलनकारी और पुलिस वालों के बीच हुए हिंसक झड़प में कई पुलिस कर्मी इनके चपेट में आ गये। लेकिन शर्म की बात है कि आंदोलनकारी एक महिला पुलिस कर्मी के साथ ऐसा बर्ताव किया, जिसे समाज में स्वीकार किया ही नहीं जा सकता। एक महिला पुलिस कर्मी आंदोलनकारियों के डर से खेत की ओर भागती है आंदोलनकारी महिला पुलिस कर्मी को दौड़कर खेत में पकड़ लेते हैं उसके बाद आंदोलनकारी जो सभी पुरूष होते हैं उनके द्वारा महिला पुलिसकर्मी की जोरदार पिटाई करते हुए महिला पुलिसकर्मी के कपड़े को खींच-खीचकर फाड़ देते हैं
और महिला पुलिस उनसे भाई -भाई कहाकर अपनी इज्जत की भीख मांगती हैं, लेकिन ये लोग महिला के साथ इतना दरिंदगी करते हैं कि महिला पुलिस कर्मी चीख-चीखकर भीख मांगते रहे और ये लोग दरिंदगी के साथ महिला की कपड़े को फाड़ते रहे, और लोग देखते रहे किसी ने नहीं रोका, ये है उस आंदोलनकारी पुरूषों की कहानी। उसी आंदोलन की एक और पहलू को देखिए महिला आंदोलनकारी भी उग्र हो गये और पुलिस कर्मियों के साथ जमकर मारपीट करने का वीडियों जारी हुआ और आप सबने देखा भी है
कि किस कदर महिलाएं पुलिस वालों के साथ मारपीट कर रहे हैं, इस मारपीट का शिकार तमनार थाना प्रभारी भी हुए, महिला थाना प्रभारी को आंदोलनकारियों ने इतना मारा कि बेहोश हो गए। बेहोश होने के बाद महिलाओं ने ही थाना प्रभारी को होश में लाने के लिए पानी पिलाई तो वहीं थाना प्रभारी के पहने कपड़े जब उपर की ओर खिसक रही थी तब महिलाओं ने ही कपड़े को नीचे की ओर खींचकर ठीक कर रहे थे और उसी आंदोलन में पुरूष आंदोलनकारी महिला पुलिस कर्मी के कपड़े फाड़ रहे थे, अब आप सोचिए कि समाज किस ओर जा रही है।
