



धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ नगर में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली पर उठा पर्दा अब व्यवस्था को नागवार गुजर रहा है। सच्चाई सामने आई तो सुधार की बजाय अफसरशाही की कुर्सी हिल गई और वही हुआ, जो अक्सर होता है—सच बोलने वाले को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया। डुगरूपारा आंगनबाड़ी केंद्र में घटिया, गुणवत्ता विहीन और मात्रा में कम पोषण आहार की खबर प्रकाशित होते ही महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी तिलमिला उठीं।

बता दें,वजन त्यौहार के दौरान अतिथि भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश संयोजक टीकाराम पटेल के सवालों से जो सच्चाई उजागर हुई थी, उस पर कार्रवाई करने की हिम्मत अफसरों में नहीं दिखी। जिन सामग्री प्रदायकर्ताओं ने बच्चों के निवाले से खिलवाड़ किया,
वे आज भी सुरक्षित हैं, जबकि उनकी पोल खोलने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। यह कार्रवाई नहीं, बल्कि खुली धमकी है।सूत्रों के अनुसार, अधिकारी यहीं नहीं रुकीं। अब कार्यकर्ताओं के घर-घर जाकर सामग्री प्रदायकर्ताओं के पक्ष में लिखवाया जा रहा है, ताकि अपनी नाकामी पर पर्दा डाला जा सके। यह हरकत खुद इस बात का प्रमाण है कि आंगनबाड़ी व्यवस्था में गड़बड़ी गहरी और सुनियोजित है।

वहीं नोटिस में लगाए गए आरोप—देर से उपस्थिति, रजिस्टरों की कमी, टीएचआर वितरण में अनियमितता और पोषण ट्रेकर ऐप में फर्जी प्रविष्टियां—अगर सच हैं, तो सवाल यह है कि यह सब अब तक अधिकारियों की नजरों से कैसे छिपा रहा? क्या धरमजयगढ़ के बाकी आंगनबाड़ी केंद्र दूध के धुले हैं? या फिर निरीक्षण केवल कागजों में होता रहा? और वहीं हकीकत यह है कि बच्चों को पोषण आहार नहीं मिल रहा, गुणवत्ता विहीन पोषण आहार परोसा जा रहा है और जिम्मेदार अफसर आंख मूंदे बैठे हैं। जब एक कार्यकर्ता ने हिम्मत कर यह सच्चाई उजागर की, तो उसे दबाने के लिए प्रशासनिक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। अब तस्वीर साफ है—यह मामला अनुशासन का नहीं, बल्कि सच को कुचलने का है। सवाल यह है कि क्या धरमजयगढ़ में सच्चाई बोलना अपराध बन चुका है? और क्या बच्चों के हक से बड़ा अफसरों का बचाव हो गया है? जनता अब जवाब चाहती है।





