
धरमजयगढ़ न्यूज़ — धरमजयगढ़ विकासखंड के अंतर्गत ग्राम भालूपखना में निर्माणधीन लघु जल विद्युत परियोजना7.5 मेगावाट शुरू से सुर्खियों में बना हुआ है. बताया जा रहा है कि अपने पावर का पूर्ण रूप से इस्तेमाल कर ये पावर कंपनी वन मंडल में अवैधानिक ढंग से कार्यों को बिना गैर वानिकी प्रयोजन किए अपना स्ट्रक्चर खड़ा कर दी है. सिर्फ इतना ही नहीं शासकीय खसरा नंबर 365 में निर्माण भी पूर्ण हो चुका है. वही ताजा मामला बाक़ारुमा परिक्षेत्र के अंतर्गत चरखापारा से भालूपखना जा रही विद्युत लाइन से जुड़ा है. जिस्मे भी वन अधिनियमों के उलंघन की खबरें आ रही हैं. मिल रही जानकारी अनुसार बिजली विभाग के द्वारा जंगल के अंदर विद्युत पोल गाड़ने की अनुमति ली गई है. जो चरखापारा से होते हुए भालू पखना की और जा रहा हैँ.जिसे विद्युत लाइन विस्तार के संबंध में बताया जा रहा है. मगर जब इस संबंध में विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारियों से बात की गई तो उनका स्पष्ट कहना है यह कार्य को संबंधित धनबादा पावर के द्वारा करवाया जा रहा है. जहां 13 मीटर के खंभे पर 8 मीटर तक 11 केवी और उसके ऊपर 33 केवी का विद्युत तार लगाया जाएगा. इस पूरे परियोजना में संबंधितो द्वारा दिए गए परमिशन और किये जा रहे कार्य मैं बड़े पैमाने पर वन अधिनियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही है.
इस विषय में जब वनमंडला अधिकारी धरमजयगढ़ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग से प्राप्त आवेदन के आधार पर उन्हें कार्य करने की स्वीकृति प्रदान की गई है. वहीं दूसरी तरफ विद्युत विभाग के अधिकारी ने स्पष्ट किया की आवेदन तो उनकी तरफ से दिया गया है मगर उक्त कार्य धनबादा पावर के द्वारा करवाए जा रहे हैं.
जब उक्त कार्य बिजली विभाग के हैं तो क्या शासन स्तर से उक्त कार्य करने के लिए राशि जारी की है?? क्या ठेकेदार को विद्युत विभाग से कार्य का वर्क आदेश जारी किया गया है?? और यदि ऐसा नहीं किया गया है तो क्या वन अधिनियमों के तहत वन मंडला अधिकारी के द्वारा संबंधित ठेकेदार और धनबादा पावर के खिलाफ कोई कार्यवाही की जाएगी या उन्हें अभय दान दिया जाएगा. धनबादा पावर के इस लाइन को लेकर पहले से भी कई आपत्तियां हैं. विद्युत लाइन विस्तार को लेकर मुरली साहू के द्वारा आवेदन दिया गया था.और रोक लगाई जाने की बात की गई थी. मगर इसके बाद भी पावर कंपनी के द्वारा पहले तो बिजली विभाग से आवेदन करवा कर वन मंडला अधिकारी से स्वीकृति ले ली जाती है. और उसके बाद यह पूरा खेल चालू होता है. कहने को तो ये लाइन विद्युत विभाग के द्वारा खींची जा रही हैँ. मगर इस स्वीकृती की आड़ में धनबादा पावर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इस पूरे कार्य को किया जा रहा हैँ.
नियमानुसार इस पूरे कार्य को करने के लिए विधिवत ढंग से धनबादा पावर को अनुमति लेने की आवश्यकता होती. मगर इस कंपनी के द्वारा पूर्व में भी अभी तक गैर वानिकी प्रयोजन की अनुमति नहीं मिल पाई है जिसे लेकर यह पूरा खेल खेला गया और बिजली विभाग आवेदक बनकर धनबादा पावर को लाभ पहुंचा रहा हैँ!
