
रायपुर। छत्तीसगढ़ की कला जगत से सुबह-सुबह दुखद खबर आई है. प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. वह लंबे वक्त से बीमार चल रही थी. रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली. उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाई. महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज़, अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने जीवंत बनाया. उनकी कला ने भारत के साथ-साथ एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया. उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष सम्मान मिला.
लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति
डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है. उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा और अथक साधना से पंडवानी को गांव की चौपाल से निकालकर विश्व मंच तक पहुंचाया. उनके जाने से लोककला जगत ने अपना एक अमूल्य नक्षत्र खो दिया है.
