
जनता की सहमति के बीना ‘जनसुनवाई’ एक छलावा – शासन-प्रशासन पर संविधान और कानून की अनदेखी के गंभीर आरोप…
धौंराभांठा न्यूज़ :- जिले के तमनार ब्लॉक अंतर्गत धौंराभांठा में गारे–पेलमा कोयला सेक्टर-1 की प्रस्तावित कोयला खदान को लेकर आयोजित की गई फर्जी जनसुनवाई के विरोध में तमनार क्षेत्र में चल रहा जनआंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को 14वां दिन धरमजयगढ़ विकासखंड से हजारों की संख्या में कोल परियोजना से प्रभावित किसान, आदिवासी और ग्रामीण तमनार के सीएसपी चौक लिबरा धरनास्थल पर पहुंचे और आंदोलन को खुला समर्थन दिया।

इस विशाल जनसमर्थन के साथ यह साफ हो गया है कि कोयला परियोजना के नाम पर जनता की जमीन, जंगल, जल और आजीविका पर किए जा रहे हमले के खिलाफ क्षेत्रीय असंतोष अब जिले की सीमाएं लांघ चुका है। जनसभा में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में जनसुनवाई को “जनता की सहमति का दिखावटी और फर्जी आयोजन” करार दिया।
शासन-प्रशासन पर संवैधानिक अधिकारों के दमन का आरोप…
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में पाँचवीं अनुसूची, पेसा कानून और ग्रामसभा की अनिवार्य सहमति को दरकिनार कर शासन-प्रशासन कॉर्पोरेट हितों के दबाव में काम कर रहा है। प्रभावित ग्रामीणों की आपत्तियों, लिखित विरोध और संवैधानिक अधिकारों को सुनने के बजाय जनसुनवाई को औपचारिकता बनाकर परियोजना थोपने की कोशिश की जा रही है।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं ने चेतावनी दी कि ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी खनन परियोजना को लागू करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह आदिवासी समाज के अस्तित्व पर सीधा हमला है। वहीं आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल…
सभा के दौरान प्रशासन पर आरोप लगाया गया कि जनसुनवाई के नाम पर पुलिस बल, दमन और डर का माहौल बनाकर ग्रामीणों की आवाज दबाई जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार और जिला प्रशासन वास्तव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं, तो पहले जनता की बात सुने और परियोजना को तत्काल निरस्त करे।
जिलेभर के आंदोलनों को एकजुट करने का संकल्प
सभा के अंत में तमनार, धरमजयगढ़ और आसपास के प्रभावित गांवों के ग्रामीणों, किसानों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने पूरे रायगढ़ जिले के जनआंदोलनों को एकजुट करने का संकल्प लिया। आंदोलनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जनसुनवाई और गारे–पेलमा कोयला परियोजना को निरस्त नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन, नारेबाजी और जनसैलाब के बीच यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि गारे–पेलमा कोयला परियोजना के खिलाफ जनविरोध अब थमने वाला नहीं है, और आने वाले दिनों में यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनने जा रहा है।
