



धरमजयगढ़ न्यूज़ — धरमजयगढ़ मे वैसे तो 1969 से सिविल न्यायालय का न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संचालित है! मगर दुर्भाग्य ऐसा कि आज पर्यंत तक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय का लिंक कोर्ट की स्थापना तक नहीं हो सकी पूर्व में भी स्थानीय अधिवक्ता संघ ने पीड़ित पक्षकारो एवं आम जन भावनाओं को देखते हुए पूर जोर कोशिश की, वही अधिवक्ता संघ धरमजयगढ़ के नव नियुक्त अध्यक्ष राजा सिंह ने पुनः आमजन भावनाओं और पीड़ित पक्षकारो की भावनाओं का सम्मान करते हुए एक लिखित पत्र माननीयो को प्रेषित किया है, पत्र के माध्यम से उन्होंने बताया है कि धरमजयगढ़ का तहसील सबसे पुराना तहसीलों में एक है, जहां आज भी व्यवहार न्यायालय न्यायाधीश वर्ग 2 का न्यायालय संचालित हो रहा है, जबकि धरमजयगढ़ विकासखंड के अंतर्गत कापू,छाल,रैरुमा भी आते हैं, जहां पर सेशन ट्रायल के प्रकरण सबसे ज्यादा दर्ज होते आए हैं, पूर्व में भी अधिवक्ता संघ द्वारा आमजन भावनाओं एवं पीड़ित पक्षकारों के हितबद्ध हेतु 1991 से इस संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं सक्षम विभाग को पत्राचार किया जा रहा है मगर आज पर्यंत तक यहां के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका, वर्तमान में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय घरघोड़ा मे हैँ. धरमजयगढ़ के अंतिम छोर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय कर एक पीड़ित पक्षकार वहां पहुंचता है, ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकारों को न्याय पाने के लिए काफी लंबे समय के साथ-साथ दूरियां भी तय करनी पड़ती है और इस क्षेत्र में ग्रामीण परिवार अशिक्षित और बेरोजगार है मेहनत मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं उनके लिए धन अर्जन कर सस्ता एवं सुलभ न्याय पाने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है आज वर्तमान में सेशन ट्रायल के प्रकरणों में पीड़ित पक्षकारों को अपने घरों से सुबह ही निकल जाना पड़ता है आवागमन के अभाव में उन्हें घर पहुंचने में भी काफी रात हो जाती है क्षेत्र हाथी प्रभावित है जनहानि भी लगा रहता है यदि धरमजयगढ़ में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय का लिंक कोर्ट की स्थापना की जाती है तो पीड़ित पक्षकारों को भी सस्ता एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो सकेगा,





