
धरमजयगढ़। प्रधानमंत्री आवास योजना, जिसका उद्देश्य गरीबों को सिर पर छत देना है, वही योजना धरमजयगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र में कुछ जिम्मेदारों के लिए भ्रष्टाचार का सुनहरा ज़रिया बनती जा रही है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा पहले ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसकी सीधी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। बावजूद इसके धरमजयगढ़ क्षेत्र की हकीकत सरकार के सख्त निर्देशों पर खुली चुनौती बनकर सामने आ रही है।
धरमजयगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायतों में आवास निर्माण का खेल काग़ज़ों में पूरा और ज़मीन पर अधूरा दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों में न शासन का भय है, न कानून का। योजना का उद्देश्य कहीं पीछे छूट गया है और आगे है सिर्फ़ फर्जीवाड़ा, कमीशन और झूठी वाहवाही।
पाराघाटी पंचायत : कागज पूरे, मकान अधूरे
ग्राम पंचायत पाराघाटी में हितग्राहियों के आवास निर्माण कार्य को दस्तावेज़ों में पूर्ण दर्शा दिया गया है, जबकि ज़मीनी सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। आधे-अधूरे आवास बरसात और धूप का मज़ाक बने खड़े हैं। हितग्राहियों ने बताया कि उन्हें तीनों किश्तों की राशि निकलवा दी गई, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ। रोजगार सहायक द्वारा दूसरे के पूर्ण आवास के सामने खड़ा कर फोटो खींच ली गई और फाइलों में आवास “पूर्ण” घोषित कर दिया गया। आगे क्या हुआ, यह न हितग्राही जानते हैं, न उनसे पूछा गया।
गोलाबुड़ा पंचायत :रोजगार सहायक बने ठेकेदार
दूसरा गंभीर मामला ग्राम पंचायत गोलाबुड़ा का है, जहां रोजगार सहायक, और पूर्व सरपंच पर आवास योजना को ठेकेदारी में तब्दील करने के आरोप हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार सहायक व पूर्व ने आवास निर्माण का ठेका अपने हाथ में ले लिया। “अच्छा से अच्छा मकान बनवा देंगे” का झांसा देकर किश्त की राशि निकलवा ली गई, लेकिन आज भी कई आवास अधूरे पड़े हैं। कागजों में आवास पूरे हैं, जबकि ज़मीन पर गरीबों के सपने अधूरे।
सचिव की ‘सत्ता’ के आगे प्रशासन बौना
पंचायत सचिव की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव कभी-कभार ही पंचायत पहुंचती हैं.
जांच से पहले ही अलर्ट सिस्टम सक्रिय
मामले को लेकर मीडिया ने मामले की पड़ताल करने गांव पहुंचे, और संबंधित रोजगार सहायक व पंचायत सचिव से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया, तो उससे पहले ही सरपंच अनिल कुमार टोप्पो द्वारा गोपनीय रूप से सूचना दे दी गई। नतीजा यह हुआ कि दोनों अधिकारियों ने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। यह चुप्पी अपने आप में बहुत कुछ कह जाती है। और इससे साफ जाहिर होता दिख रहा है कि भ्रष्टाचार को अंजाम देने के बाद संबंधित जिम्मेदार कर्मचारी मुंह छिपाते हुए नजर आ रहे हैं।
बड़ा सवाल : सख्ती सिर्फ़ बयान तक?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री स्वयं प्रधानमंत्री आवास योजना में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की बात कर चुके हैं, तो धरमजयगढ़ में यह लूट कैसे बेखौफ जारी है? क्या शासन के निर्देश केवल काग़ज़ों तक सीमित हैं? और अगर यही हाल रहा तो पंचायत विकास की बातें करना महज़ एक दिखावा बनकर नहीं रह जाएगा?
लेकिन गरीबों के आशियाने पर पल रहे इस भ्रष्टाचार पर यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रधानमंत्री आवास योजना का सपना धरमजयगढ़ में हमेशा के लिए अधूरा ही रह जाएगा।
