



धरमजयगढ़ न्यूज़ — धरमजयगढ़ में वैसे तो 1969 से सिविल न्यायालय का न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संचालित है. वर्षों बीत जाने के बाद भी जिला एवं सत्र न्यायालय के कोर्ट की स्थापना नहीं हो सकी है.जिसे लेकर के स्थानीय नागरिको, जनप्रतिनिधियों व बार काउंसिल ने लगातार आवाजे उठाई है.न्यायालय कलेक्टर से पारित आदेश के अनुसार नजूल टाउन धरमजयगढ़ तहसील धरमजयगढ़ जिला रायगढ़ स्थित नजूल प्लाट नंबर 1375 1370,1383,1386/1 एवं 1385 मैं कुल 10.96 एकड़ की जमीनों में से 3.59 एकड़ को नवीन न्यायालय परिसर निर्माण किए जाने हेतु छत्तीसगढ़ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग रायपुर के पत्र अनुसार राज्य शासन के विभागों को निशुल्क भूमि आवंटन सम्बन्धी दिए गए निर्देश के अनुक्रम मे तथा राजस्व परिपत्र खंड चार क्रमांक एक की कंडिका 36 में दिए गए प्रावधान के तहत न्यायिक विभाग को शर्तों के तहत हस्तांतरित किया गया है!

आवंटित जमीन को लेकर के आज संबंधित अधिकारियों द्वारा मौका मुआयना किया गया. जहां पर पुलिस विभाग के कुछ परिजनों (महिलाओं) द्वारा विरोध किया गया उनका कहना था कि कई वर्षों से यहां थाना संचालित है और यह जमीन भी थाना परिषर की है. न्यायालय परिसर के यहां आने से हमारा आशियाना नहीं रह जाएगा और हम सब कहां जाएंगे.

वही इस विषय मे जिला भाजपा के उपाध्यक्ष गोकुल नारायण यादव ने कहा है कि एडीजे कोर्ट की स्थापना से ग्रामीण अंचल सहित पूरे क्षेत्र के लोगों को न्यायोचित लाभ मिलेगा. भूमि आवंटन के विषय को लेकर कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया प्रशासन और न्याय विभाग के बीच का है वही हो रही आपत्तियों का निराकरण भी प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा!

बार काउंसिल के अध्यक्ष राजा सिंह ने कहा कि वर्ष 1991 से सतत रूप से हम अधिवक्ताओं द्वारा एडीजे कोर्ट की स्थापना के लिए प्रयास किया जा रहा है. ताकि धर्मजयगढ़ के रहवासियों एवं पीड़ित पक्षकारों को सस्ता एवं उचित लाभ मिल सके,,,इसी तत्वाधान में पुलिस लाइन स्थित भू खंड जो कि आज पर्यंत पुलिस लाइन के नाम से आबंटित नहीं है वहां माननीय जिला कलेक्टर महोदय रायगढ़ द्वारा 3.59 डिसमिल भूमि को एडीजे कोर्ट के लिए आबंटित किया गया है,,,,उक्त भूमि के संबंध में मै आपको बता दूं कि पुलिस थाना धरमजयगढ़ स्थित उक्त भू खंड 10 एकड़ लगभग 96 डिसमिल भूमि है जहां पुलिस थाना धरमजयगढ़ में पदस्थ कर्मचारियों सहित उक्त कोर्ट की स्थापना सहजता के साथ हो सकता है,,,,,यह भूमि का आबंटन प्रशासन एवं न्याय विभाग के बीच है इसमें हम अधिवक्ताओं का किसी प्रकार अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं है ।
बहरहाल ए.डी.जे.कोर्ट की स्थापना के बाद समूचे क्षेत्र सहित ग्रामीण अंचल के नागरिकों के लिए एक अच्छी न्यायपालिका की व्यवस्था होने की उम्मीद जताई जा रही है जो जल्द ही निकट भविष्य मे यहां देखने को मिल सकता है! जिसका स्थानीय लोगों को भी बरसों से इंतजार है!






