



धरमजयगढ़। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, जिसे वर्ष प्रतिपदा के रूप में जाना जाता है, भारतीय संस्कृति में नवआरंभ, नवसंकल्प और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक पर्व है। इसी पावन तिथि से हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ होता है, जो समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, सनातन परंपराओं और राष्ट्रहित के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।
आपको बता दें, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सृष्टि के सृजनकर्ता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। यही तिथि हिन्दू पंचांग के नववर्ष का आरंभ भी मानी जाती है तथा महान सम्राट विक्रमादित्य द्वारा प्रारंभ किया गया विक्रम संवत भी इसी दिन से शुरू होता है। देश के विभिन्न हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग स्वरूपों में मनाया जाता है,दक्षिण भारत में ‘उगादी’ के रूप में, महाराष्ट्र में ‘गुड़ी पड़वा’ के रूप में, वहीं सिंधी समाज में ‘चेट्रीचंड’ के रूप में भगवान झूलेलाल की जयंती के साथ यह दिन विशेष महत्व रखता है। संघ परंपरा में भी इस दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
बता दें,इस पावन अवसर पर समाज को धर्म, संस्कृति और कर्तव्य के प्रति जागरूक करते हुए विभिन्न धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। नववर्ष के स्वागत हेतु प्रातःकाल स्नान-पूजन, घर एवं प्रतिष्ठानों में भगवा ध्वज स्थापना, तोरण एवं रंगोली सजावट तथा पंचांग के अनुसार शुभ संकल्प लेने का संदेश दिया गया है। साथ ही, बड़ों का आशीर्वाद लेकर भारतीय संस्कारों को आत्मसात करने का भी आह्वान किया गया है।
इसी क्रम में धरमजयगढ़ में हिन्दू नववर्ष के उपलक्ष्य में 19 मार्च 2026, गुरुवार को दोपहर 2 बजे दशहरा मैदान से भव्य बाइक रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात 27 मार्च 2026 को दोपहर 2 बजे से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसका समापन राम मंदिर, नीचे पारा, धरमजयगढ़ में होगा।
और वहीं समस्त हिन्दू समाज से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस सांस्कृतिक उत्सव को गरिमामय बनाएं और नववर्ष का स्वागत सामूहिक उत्साह एवं श्रद्धा के साथ करें।






