
नये कानून से घबरा कर अनर्गल आरोप प्रत्यारोप में लग गये विधर्मी: महेश चैनानी
धरमजयगढ़।
छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026’ पारित किया है, जो अत्यंत कठोर है।कानून का स्वागत करते हुए प्रदेश भाजपा के संयोजक टीकाराम पटेल एवं जिला भाजपा सदस्य महेश चैनानी ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि इस नये कानून के तहत जबरन, लालच या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने पर आजीवन कारावास तक की सजा और भारी जुर्माने (5 से 30 लाख तक) का प्रावधान है। यह कानून गैर-जमानती है और इसमें 10-20 साल की कैद भी शामिल है।विज्ञप्ति में कहा गया है की इस नये कानून से घबराकर कुछ विधर्मी संघ और हिन्दु ध्वजवाहकों पर अनर्गल आरोप प्रत्यारोप करने में लग गये हैं।
छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण कानून की मुख्य विशेषताएं
कठोर सजा: दोषी पाए जाने पर 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा।
जुर्माना: 5 लाख से 30 लाख रुपये तक का जुर्माना।
अपराध की प्रकृति: सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) होंगे।
विशेष प्रावधान: महिलाओं, नाबालिगों, अनुसूचित जाति (SC), और अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों के धर्मांतरण पर 10 से 20 साल तक की कैद।
सामूहिक मतांतरण: सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कराने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और भारी जुर्माना।
सूचना अनिवार्य: स्वैच्छिक मतांतरण के लिए भी अब जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा।
पैतृक धर्म वापसी: अपने पैतृक धर्म में वापसी को इस कानून के तहत मतांतरण नहीं माना जाएगा।
विशेष अदालत: इस कानून के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष सत्र न्यायालय का गठन किया जाएगा।
डिजिटल माध्यम: डिजिटल माध्यमों से दिए जाने वाले प्रलोभन को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
यह विधेयक छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 1968 को प्रतिस्थापित करेगा, जिसका उद्देश्य अवैध धर्मांतरण पर पूरी तरह से रोक लगाना है। इस कानून के पास होने पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया है और शीघ्र ही धाराजयगढ़ के अम्बेटीकरा में धन्यवाद ज्ञापन हेतु प्रबल प्रताप जी के नेतृत्व में माता पुजारियों का विशाल आमसभा का आयोजन किया जायेगा।
