
“धरमजयगढ़ वन मंडल बना हाथियों का कब्रिस्तान!” : “भ्रष्ट सिस्टम के बीच दम तोड़ रहे जंगल के गजराज!” “हाथियों की मौत पर कौन जिम्मेदार? सवालों में वन विभाग!”
: छत्तीसगढ़ टुडे 24 न्यूज़ धरमजयगढ़ —
धरमजयगढ़ वन मंडल में लगातार हो रही हाथियों की मौत अब गंभीर चिंता और बड़े सवाल का विषय बन चुकी है। जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला वन विभाग अब खुद कटघरे में नजर आ रहा है। क्षेत्र में लगातार हाथियों की मौत के बावजूद विभाग केवल खानापूर्ति और कागजी कार्रवाई तक सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह फेल साबित हो रही है।
रविवार को धरमजयगढ़ वन मंडल में एक हाथी शावक की मौत ने पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का आरोप है कि यदि वन विभाग समय रहते निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करता, तो शायद इस मासूम हाथी शावक की जान बचाई जा सकती थी।

क्षेत्र में लगातार हाथियों की मौत के बावजूद विभागीय अधिकारियों की प्राथमिकता वन्यजीव संरक्षण नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और कागजी योजनाओं तक सीमित होने के आरोप लग रहे हैं। करोड़ों रुपये वन्यजीव संरक्षण और हाथी प्रबंधन के नाम पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर न तो हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पा रही है और न ही मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए कोई प्रभावी पहल दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के मूवमेंट वाले क्षेत्रों में न तो पर्याप्त निगरानी होती है और न ही समय पर रेस्क्यू टीम पहुंचती है। कई बार वन विभाग की लापरवाही के कारण घायल या बीमार हाथियों को समय पर इलाज तक नहीं मिल पाता।
रविवार को हुई हाथी शावक की मौत के बाद अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर लगातार हो रही इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? क्या वन विभाग सिर्फ फाइलों में संरक्षण अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है?
वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की मौत का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।“
