
पंचायत भवन और नाली निर्माण अधूरे होने के बावजूद राशि आहरण का आरोप, जांच हुई तो सामने आ सकती हैं कई अनियमितताएं!
धरमजयगढ़ न्यूज़ —
धरमजयगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत सोखामुड़ा में पंचायत के विकास कार्यों और राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मिली जानकारी अनुसार, पंचायत भवन सहित नाली निर्माण जैसे कार्य अधूरे पड़े हैं, जबकि संबंधित कार्यों के लिए राशि निकाले जाने की बात सामने आ रही है। सवाल के जवाब में सरपंच पति ने बताया कि नाली निर्माण के कार्य के लिए पैसे निकाले गए हैं जिसका कार्य भी जल्द प्रारंभ कर दिया जाएगा! वही उक्त राशि सामान खरीदने के लिए दुकानदार को दिया गया हैँ.इस पूरे मामले को लेकर पंचायत के सरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
अधूरे निर्माण कार्यों के बीच राशि आहरण पर सवाल
शासन द्वारा ग्राम पंचायतों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई जाती है, ताकि ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें। लेकिन यदि किसी पंचायत में निर्माण कार्य अधूरे हों और उनकी तुलना में भुगतान या राशि आहरण की स्थिति संदिग्ध हो, तो इसकी जांच कराया जाना आवश्यक हो जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत सोखामुड़ा में पंचायत भवन और नाली निर्माण जैसे कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। आरोप यह भी है कि कुछ कार्यों में राशि निकालने के बाद भी लंबे समय तक निर्माण पूरा नहीं कराया गया। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पंचायत के कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
जांच में सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
मामले की वास्तविकता जानने के लिए निर्माण कार्यों की स्वीकृत राशि, तकनीकी प्राक्कलन, कार्यादेश, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान विवरण और स्थल पर हुए निर्माण का भौतिक सत्यापन जरूरी है। जांच में यह भी स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित कार्यों में कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी निकाली गई और उसके अनुरूप कितना निर्माण कार्य पूरा किया गया है।
ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्राम पंचायत में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की तैयारी मे है। ग्रामीण चाहते हैं कि पंचायत भवन और नाली निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों की जांच कराई जाए तथा यदि सरकारी राशि के दुरुपयोग या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात होगी कि जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ग्रामीणों की मांग पर जांच कराते हैं या नहीं। फिलहाल, पंचायत के निर्माण कार्यों और राशि के उपयोग से जुड़े सवालों का जवाब आधिकारिक जांच तथा संबंधित अभिलेखों के परीक्षण से ही स्पष्ट हो सकेगा।
