
धरमजयगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार के विकास दावों की जमीनी हकीकत धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर के आश्रित मुहल्ले कौवाडाही में साफ दिखाई दे रही है। यहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा समुदाय के 10–12 परिवार आज भी सड़क, शुद्ध पेयजल, शिक्षा और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

वहीं ग्रामीणों के अनुसार, गांव में शुद्ध पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और लोग ढोढ़ीनुमा कुएं का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्कूल के सामने वर्षों से खराब पड़ा हैंडपंप आज तक ठीक नहीं कराया गया। और वहीं स्कूल भवन मरम्मत के लिए शासन द्वारा जारी किए राशि में से 2 लाख 96 हजार 950 रुपये आहरण पंचायत सचिव द्वारा कर लिए गए थे, लेकिन मरम्मत नहीं होने से बच्चों को आंगनबाड़ी भवन में पढ़ाया जा रहा है।
और वहीं एक और बड़ी खबर सामने आई है, बता दें,स्कूल में दो शिक्षकों की पदस्थापना होने के बावजूद एक शिक्षक की नियमित अनुपस्थिति और पिछले दो माह से मध्यान भोजन बंद रहने की भी शिकायत सामने आई है। इसके अलावा कौवाडाही तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है, जिससे बरसात के दिनों में आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है।

वहीं ग्रामीणों ने राशन वितरण में भी अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एक माह का राशन नहीं मिला और वितरण में कटौती की जाती है। मामले में वर्तमान सरपंच छत्तर सिंह राठिया का कहना है कि पूर्व सरपंच की अनियमितताओं के कारण समस्या उत्पन्न हुई है और पंचायत स्तर पर समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
बहरहाल कौवाडाही की स्थिति ने शासन-प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच और कार्रवाई कर पहाड़ी कोरवा समुदाय को उनका अधिकार कब तक दिलाया जाता है।
