
सक्ती। धान खरीदी के दौरान गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं के मामले में सक्ती जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देश पर दो पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है और एक धान खरीदी प्रभारी के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
विशेश्वर सिंह सिदार – नोडल अधिकारी की अनुपस्थिति पर कार्रवाई
तहसील भोथिया के धान उपार्जन केंद्र के नोडल अधिकारी विशेश्वर सिंह सिदार को 16 जनवरी को आयोजित टोकन सत्यापन समीक्षा बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। जारी आदेश में कहा गया है कि बैठक में उनकी अनुपस्थिति और केंद्र के कार्य में लापरवाही ने शासन की योजना को प्रभावित किया। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय तहसील भोथिया रहेगा और नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(1) के तहत की गई है।
शेरसिंह राठिया – भौतिक सत्यापन और टोकन कार्य में लापरवाही
इसी तरह सकर्रा और सोनादुला समितियों के नोडल अधिकारी के रूप में कार्यरत मालखरौदा अनुविभाग के हल्का पटवारी शेरसिंह राठिया को भी उनके दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करने, भौतिक सत्यापन में लापरवाही बरतने और टोकन सत्यापन में अनियमितता बरतने के आरोप में निलंबित किया गया है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि उनके इस कृत्य ने शासन के निर्देशों की अवहेलना और कार्य में उदासीनता का परिचय दिया। निलंबन काल में उनका मुख्यालय तहसील अड़भार रहेगा और उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता दी जाएगी। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966, उपनियम 9 के तहत की गई है।
हेमंत चंद्रा – स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी, FIR के आदेश
ग्राम सोनादुला के धान खरीदी केंद्र प्रभारी हेमंत चंद्रा के खिलाफ स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी पाए जाने के कारण FIR दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कदम धान खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
प्रशासन का संदेश और आगे की कार्रवाई
सक्ती जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि धान खरीदी में लापरवाही और अनियमितताओं के मामलों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समीक्षा बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, और सभी अधिकारियों को अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार और सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि शासन की योजनाओं को प्रभावित करने वाली किसी भी प्रकार की उदासीनता के खिलाफ तुरंत कदम उठाया जाएगा।
