
धरमजयगढ़ न्यूज़ — काफ़ी जदौजहत के बाद पुरुँगा ग्राम के ग्रामीणों के आगे प्रशासन और कंपनी नें घुटने टेक दिए और जनसुनवाई के एक दिन पहले शाम को प्रशासन नें पत्र जारी कर पुरुँगा की होने वाली जनसुनवाई को निरस्त कर दिया!आपको बता दे की पूरे ग्रामीणों की यही एकजुटता कंपनी के लिए सिरदर्द बना हुआ था,जो कंपनी के जनसुनवाई निरस्त करनें को मजबूर कर दिया हलात ऐसे थे मानो ग्रामीणों नें बाहरी व्यक्तियो के लिए कर्फ्यू लगा रखा हो,

एक बार फिर अब हलचले तेज हो गई है, सूत्रों से मिल रही जानकारी अनुसार जनवरी मे जनसुनवाई होने की संभावना है.ऐसे मे ग्रामीण भी काफ़ी सक्रिय हो गए है. विरोध का स्वर पिछले बार की तुलना और भी ज्यादा गहराने की संभावना है.कल तक आंदोलन में कंधा से कंधा मिलाकर चलने का दावा करने वाले यही लोग जल्द ही पुरूंगा गांव के हितैषी बने ऐसे मिलेंगे, मानो ग्रामीणों के सच्चे हमराही हों। पर सवाल वही खड़ा है—
यदि ये वास्तव में ग्रामीणों के साथी हैं, तो जन सुनवाई की आहट सुनते ही कंपनी के दफ्तर में किस सौदे की तलाश में दौड़ रहे हैं?

पुरूंगा में अब उम्मीद और आशंका दोनों साथ-साथ चल रही हैं। ग्रामीण एक बार फिर सतर्क हैं—क्योंकि उन्हें पता है कि जन सुनवाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके भविष्य का फैसला करने वाली कड़ी है।
