
एक ही दल में लगातार हो रही शावकों की मौत ने बढ़ाई चिंता, कैमरों से होगी निगरानी; मौतों के कारणों पर अब भी सवाल
धरमजयगढ़ न्यूज़ | रायगढ़
धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों के दौरान 13 हाथी शावकों की मौत का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। लगातार हो रही इन मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए विभाग ने हाथियों के एक संदिग्ध दल की गतिविधियों पर विशेष नजर रखने की तैयारी की है। विभाग अब कैमरों की मदद से हाथियों के व्यवहार, उनकी आवाजाही और दल की गतिविधियों की निगरानी करेगा।
प्राप्त समाचार के अनुसार, धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में हाथियों की लगातार हो रही मौतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि आखिर शावकों की मौत किन परिस्थितियों में हो रही है और क्या इन घटनाओं का संबंध किसी विशेष हाथी दल के व्यवहार से है।
छाल क्षेत्र में 54 हाथियों के दल पर विशेष निगरानी
जानकारी के मुताबिक, छाल क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 54 हाथियों का एक दल मौजूद है, जिसमें करीब 39 हाथियों का संदिग्ध दल भी शामिल बताया गया है। इस दल में हाथियों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है। विभाग अब दल की गतिविधियों को कैमरों में रिकॉर्ड करने और उनके व्यवहार का अध्ययन करने की तैयारी कर रहा है, ताकि किसी असामान्य गतिविधि की पहचान की जा सके।
तीन साल में 13 शावकों की मौत, कारण अब भी स्पष्ट नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, बीते तीन वर्षों में 13 हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। हाल ही में 11 अक्टूबर की रात सीलिंग गांव के खेत में एक शावक के कीचड़ में फंसने की घटना सामने आई थी। इसके बाद 13 अक्टूबर को तिलाईखार क्षेत्र के खेत में एक शावक का शव मिलने की जानकारी भी सामने आई। इन घटनाओं ने हाथियों की सुरक्षा और उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, सभी मौतों के पीछे एक ही कारण होने या किसी विशेष हाथी दल की भूमिका होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। मौतों की वास्तविक वजह जानने के लिए विस्तृत जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
कैमरों से होगी गतिविधियों की निगरानी
धरमजयगढ़ के डीएफओ सत्यदेव शर्मा के अनुसार, एक ही हाथी दल में शावकों की मौत होने की आशंका को देखते हुए विभाग इस एंगल से भी जांच कर रहा है। संदिग्ध दल की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाथियों का व्यवहार सामान्य है या उनमें कोई असामान्य गतिविधि दिखाई दे रही है।
वन्यजीव संरक्षण को लेकर उठे सवाल
धरमजयगढ़ वन मंडल हाथियों की आवाजाही और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में लगातार शावकों की मौत वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि कैमरों से मिलने वाले साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच से इन घटनाओं की असली वजह सामने आ पाती है या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हाथी शावकों की लगातार मौत क्यों हो रही है? वन विभाग की जांच से उम्मीद है कि इस मामले में स्थिति स्पष्ट होगी और हाथियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
