
धरमजयगढ़ न्यूज़ — धरमजयगढ़ मे बोरो रेंज के अंतर्गत ग्राम नेवार इन दोनों वनों की कटाई अतिक्रमण को लेकर मामला सामने आ रहा है. बताया जा रहा है कि जंगलो के अंदर बड़े पैमाने पर वनों को साफ कर मशीन के माध्यम से कृषि योग्य भूमि बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.इतना ही नहीं जमीनों में मशीन लगाकर बोर खनन तक का कार्य कर लिया गया है.
प्रकृति की हरियाली से आच्छादित धरमजयगढ़ का वनांचल इन दिनों मानो किसी मौन पीड़ा से गुजर रहा है। बता दें,बोरो वनपरिक्षेत्र के अंतर्गत नेवार के जंगलों की कटाई और अतिक्रमण की खबरें सामने आ रही हैं, जो न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए खतरा हैं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रही हैं।
मिली जानकारी अनुसार बताया जा रहा है कि इन वनों के भीतर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर भूमि को समतल किया जा रहा है। आधुनिक मशीनों की मदद से हरे-भरे जंगलों को साफ कर कृषि योग्य जमीन में परिवर्तित करने का कार्य तेजी से जारी है। जहां कभी वृक्षों की सघन छाया और वन्यजीवों की चहल-पहल होती थी, वहीं अब मिट्टी के ढेर और मशीनों की आवाजें गूंज रही हैं।

वहीं आगे स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, अतिक्रमणकारियों द्वारा जमीन पर अधिकार जमाने के उद्देश्य से बोर खनन तक किया जा चुका है। यह पूरा घटनाक्रम इस ओर संकेत करता है कि कार्य सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। लेकिन वहीं सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इतने व्यापक स्तर पर चल रहे इस अवैध कार्य के बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौन साधे हुए हैं। उनकी भूमिका को लेकर क्षेत्र में संदेह और असंतोष का माहौल है। स्थानीय जनमानस यह सवाल उठा रहा है कि क्या यह सब प्रशासन की जानकारी के बिना संभव है, या फिर कहीं न कहीं लापरवाही अथवा मिलीभगत इस विनाश की वजह बन रही है।
फिलहाल धरमजयगढ़ का यह वन क्षेत्र न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय आदिवासी जीवन और जैव विविधता का आधार भी है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम दूरगामी और गंभीर हो सकते हैं।
लेकिन अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाता है,और क्या इन हरे-भरे जंगलों को विनाश की कगार से बचाया जा सकेगा, या फिर यह मौन विनाश यूं ही जारी रहेगा।
