

धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ उप पंजीयक कार्यालय की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पिता के नाम दर्ज जमीन को अपने नाम कराने पहुंचे एक पक्षकार(पुत्र)को कथित तौर पर लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मामला एसडीएम कार्यालय भेजे जाने के बाद एसडीएम ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि प्रकरण उनके कार्यालय से संबंधित नहीं है और पंजीयन अधिनियम के तहत आवश्यक कार्रवाई उप पंजीयक स्तर से की जा सकती है।
इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने से पक्षकार ने अब उच्च अधिकारियों से शिकायत की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रतिबंधित जमीन का हवाला, दस्तावेजों ने खड़े किए सवाल
उप पंजीयक की ओर से कोल कंपनियों से जुड़े क्षेत्रों में खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध का हवाला दिया गया। वहीं पक्षकार का दावा है कि उसने कलेक्टर रायगढ़ का आदेश प्रस्तुत किया है, जिसमें प्रतिबंध केवल अधिग्रहित भूमि के चिन्हित खसरा नंबरों पर लागू है और अन्य क्षेत्रों से प्रतिबंध हटाया गया है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब संबंधित जमीन प्रतिबंधित खसरा नंबर में शामिल नहीं है, तो पंजीयन रोकने का आधार क्या है?
धरमजयगढ़ उप पंजीयक कार्यालय में पूर्व में भी शासकीय, आवंटित जमीनों से जुड़े पंजीयन मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब इस नए मामले ने कार्यालय की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पक्षकार अब पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की तैयारी में है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि पंजीयन में वास्तविक वैधानिक अड़चन है या मामला अनावश्यक रूप से पक्षकार को परेशान करने के उद्देश्य से लंबित रखा जा रहा है।



