
छत्तीसगढ़ टुडे 24 न्यूज़ धर्मजयगढ़ /रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित दुर्गापुर-।। सरिया-तराईमार कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर विरोध की आहट तेज होती दिखाई दे रही है। कोयला मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कोल बेरिंग एरिया (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 की धारा-7 के तहत अधिसूचना जारी किए जाने के बाद प्रभावित गांवों में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोयला मंत्रालय ने वर्ष 2020 में उक्त कोल ब्लॉक कर्नाटक पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड (केपीसीएल) को आवंटित किया था।
के.पी.सी.एल.के ओपन कोल ब्लॉक से पूरा गांव का होगा विस्थापन
धरमजयगढ़ के इस परियोजना के अंतर्गत धरमजयगढ़ तहसील के तराईमार, मेडरमार, धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ कॉलोनी, बयासी, बयासी कॉलोनी एवं रुपुंगा सहित कुल 7 गांवों की लगभग 1610.75 हेक्टेयर भूमि प्रभावित क्षेत्र में शामिल है।बताया जा रहा है कि पूर्व में यही कोल ब्लॉक डी.बी. पावर लिमिटेड और वेदांता समूह के लिए प्रस्तावित था, लेकिन वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के कई कोल ब्लॉकों की आवंटन प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए निरस्त कर दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस कोल ब्लॉक का आवंटन केपीसीएल को किया।
परंतु इस कोल ब्लॉक में दुर्गापुर सरिया कोल ब्लॉक क्षेत्र अंतगत नगर पंचायत भी प्रभावित हो रहा है,जिसमें खास कर वार्ड नंबर 8 संतोष नगर चर्च का पूरा एरिया,पतरापारा,धरमजयगढ़ कालोनी शामिल है नगर के क्षेत्रों से 128 परिवार को विस्थापन करना होगा,वही दुर्गापुर तराईमार में जानकारी अनुसार 5 गांव का पूर्ण रूप से विस्थापन होगा जिसमें ग्राम बायसी,हाथीगाड़ा कालीनों,ढालीपरा,तराईमार और बायसी कालीनों का नाम शामिल है,ऐसे में आने वाले दिनों में पूर्व के समय जो विरोध देखा गया था,उस विरोध का आने वाले दिनों में असर देखना लाजिमी है।
ग्राम सभाओं ने पहले ही जता दिया है विरोध
क्षेत्र में खनन परियोजना का विरोध नया नहीं है। कुछ माह पूर्व ग्राम पंचायत बयासी और बयासी कॉलोनी में आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने प्रस्ताव पारित कर परियोजना का विरोध किया था। ग्राम सभा के प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र वन भूमि और हाथियों के आवागमन वाले इलाके से जुड़ा हुआ है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका है।ग्रामीणों का कहना है कि खनन शुरू होने से जंगल, जलस्रोत, कृषि भूमि और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ग्राम सभा में यह भी निर्णय लिया गया था कि ग्रामीण अपने प्रस्ताव को वन मंत्रालय, भारत सरकार सहित संबंधित विभागों तक पहुंचाएंगे।
रोजगार बनाम जंगल-जल-जमीन की बहस फिर तेज
धारा-7 की अधिसूचना जारी होने के बाद भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर प्रभावित गांवों के लोग अपने जंगल, जल, जमीन और आजीविका को लेकर चिंतित हैं।
फिर उठ सकता है विरोध का बिगुल
क्षेत्र में पहले भी कोल ब्लॉक परियोजनाओं के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन देखे जा चुके हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की नई अधिसूचना के बाद एक बार फिर ग्रामीणों के बीच लामबंदी शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में ग्राम सभाओं और प्रभावित गांवों की बैठकों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
