
धरमजयगढ़ (छत्तीसगढ़)। राष्ट्रीय राजमार्ग भारतमाला परियोजना 130A में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तहसील धरमजयगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेढरमार एवं अन्य प्रभावित गांवों के भू-स्वामियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और निर्माण एजेंसी पर तानाशाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी कानूनी कब्जा सूचना (Possession Notice) के उनकी निजी जमीनों पर बलपूर्वक पिलर लगाए जा रहे हैं, जिसके विरोध में उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सह सक्षम प्राधिकारी को पत्र सौंपकर काम पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
क्या है मुख्य विवाद और कानूनी त्रुटि?
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए आवेदन के अनुसार, इस पूरे मामले में मुआवजे के निर्धारण (Award) को लेकर एक बड़ी विधिक चूक (कानूनी गलती) सामने आई है:
- गलत कट-ऑफ डेट का इस्तेमाल: भू-स्वामियों ने बताया कि प्रशासन द्वारा अवार्ड निर्धारण के लिए समाचार पत्र में प्रकाशन की तिथि 21/02/2026 को आधार माना गया है, जो कि पूरी तरह गलत है।
- लाखों का नुकसान: नियमानुसार राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन की तिथि 17/02/2026 को आधार माना जाना चाहिए था। इस तकनीकी त्रुटि के कारण प्रभावित ग्रामीण 20/02/2026 से लागू हुए ‘3 गुना उच्च नवीन कलेक्टर गाइडलाइन दरों’ के लाभ से वंचित हो गए हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
आजीविका छीनने का खतरा, प्रशासन मौन
ग्रामीणों ने पत्र में भावुक होते हुए कहा कि यह जमीन उनकी पैतृक संपत्ति है और उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। प्रभावित भू-स्वामियों ने इससे पहले भी 28/09/2026 को एक संयुक्त आवेदन और 08/10/2026 को स्मरण-पत्र (Reminder) दिया था, लेकिन प्रशासन या सक्षम न्यायालय द्वारा अब तक इस पर कोई कानूनी निर्णय या निराकरण नहीं किया गया है।
काम रोकने और कार्रवाई की चेतावनी
ग्रामीणों का आरोप है कि एक तरफ उनकी विधिक आपत्तियां लंबित हैं, तो दूसरी तरफ NHAI और उनके ठेकेदार अवैध रूप से काम की गति को बढ़ा रहे हैं और जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक मुआवजे के विवाद का सही निराकरण नहीं हो जाता, तब तक जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
