
छत्तीसगढ़ टुडे 24 न्यूज़ रायपुर —
छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति, पुत्र, भाई, बहन अथवा अन्य निकट पारिवारिक सदस्यों को प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में नामित किए जाने की प्रथा पर रोक लगा दी गई है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा 6 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 तथा छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 के अंतर्गत प्रतिनिधि नामांकन संबंधी नियमों में संशोधन किया गया है।
राजपत्र में प्रकाशित संशोधन के अनुसार, निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक सदस्य या नातेदार को उनके प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामनिर्दिष्ट या नियुक्त नहीं किया जाएगा।
महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकार और भूमिका होगी स्पष्ट
सरकार के इस संशोधन को नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की स्वतंत्र भूमिका और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब महिला पार्षद, अध्यक्ष अथवा अन्य निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पारिवारिक सदस्यों द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने की व्यवस्था पर रोक रहेगी।
यह अधिसूचना छत्तीसगढ़ राजपत्र में 7 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुई है। राजपत्र के अगले पृष्ठ पर इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित किया गया है।
खास बात: आदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि निकट पारिवारिक सदस्य अथवा नातेदार को निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में नामनिर्दिष्ट अथवा नियुक्त नहीं किया जाएगा।
