बाकारुमा रेंज में खैर लकड़ी से भरा ट्रक जब्त, चालक फरार — संरक्षण या नाकामयाबी?
धरमजयगढ़ न्यूज़। धरमजयगढ़ वन मंडल में खैर लकड़ी की तस्करी का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग की टीम ने बाकारुमा–लैलूंगा मार्ग पर खैर लकड़ी का परिवहन कर रहे एक ट्रक को जब्त किया है। कार्रवाई के दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रक चालक मौके से फरार हो गया।
फिलहाल वन विभाग की टीम जब्त लकड़ी की मात्रा, उसके परिवहन से संबंधित दस्तावेज और ट्रक मालिक सहित अन्य जानकारियां जुटाने में लगी हुई है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जंगल से खैर जैसी कीमती लकड़ी काटकर उसे परिवहन किए जाने तक वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
पूर्व में भी सामने आ चुके हैं तस्करी के मामले
बताया जा रहा है कि बाकारुमा वन परिक्षेत्र में पूर्व में भी तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद खैर लकड़ी के अवैध परिवहन का सिलसिला पूरी तरह रुकता नजर नहीं आ रहा है। एक के बाद एक मामलों के सामने आने से वन सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और गश्त पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल की सुरक्षा केवल कार्रवाई के बाद वाहन पकड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यदि जंगल में लगातार अवैध कटाई और लकड़ी का परिवहन हो रहा है तो वन विभाग के मैदानी अमले की नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीरता से सवाल उठाए जाने चाहिए।
एक दिन में तो नहीं कटता इतना बड़ा पेड़!
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जिस खैर लकड़ी को तस्करी के लिए वाहन में लादकर ले जाया जा रहा था, क्या वह पेड़ एक ही दिन में काटकर सीधे सड़क तक पहुंच गया? यदि कटाई पहले हुई थी तो जंगल की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अमले को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली?
शासन द्वारा वन संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार योजनाओं एवं संसाधनों पर खर्च किया जा रहा है। ऐसे में यदि जंगलों से बेशकीमती पेड़ों की कटाई और तस्करी जारी रहती है तो यह वन सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमजोरी मानी जाएगी।
तस्करों पर शिकंजा या सिर्फ वाहन जब्ती तक कार्रवाई?
ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा भी है कि क्या विभाग केवल लकड़ी से भरे वाहनों को पकड़कर कार्रवाई तक सीमित रहेगा या तस्करी के पूरे नेटवर्क और जंगल में अवैध कटाई करने वालों तक भी पहुंचेगा?
बाकारुमा क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले की जांच को कितनी गंभीरता से आगे बढ़ाता है और क्या लकड़ी के स्रोत, कटाई करने वालों तथा इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क तक पहुंच पाता है।
वनों की लगातार कटाई और तस्करी यदि नहीं रुकी तो आने वाले समय में इसका सीधा असर वन संपदा और वन्यजीवों के संरक्षण पर पड़ सकता है। ऐसे में ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावी गश्त, नियमित निगरानी और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
